सब्र रख ऐ दोस्त

सब्र रख ऐ दोस्त वक्त आयेगा तो हम भी आसमाँ मे उड़ना सीख लेगे,
अभी गिर रहे है तो क्या हुआ गिरते-गिरते सम्हलना सीख लेगे,
ले आये जिन्दगी अगर चौराहे पर और खो जाये मंजिले तो गम क्या करे,
हमभी वक्त बे वक्त पर अपने रास्ते बदलना सीख लेगे।
लोगो की भागदौड़ मे हमे सरकता देखकर वो मजाक उड़ा रहे है मेरा,
कोई बताओ उन्हे सरकते सरकते हम भी चलना सीख लेगे ।
अगर बदलकर मिजाज वो रइसो के महफिल मे जा पहुंचे,
हम भी मिटा कर नाज अपना गरीबो मे रहना
सीख लेगे …।।।

S उपाध्याय

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